एक मुलाक़ात ब्लॉगर वाणी शर्मा से



आज हम बात कर रहे है "ज्ञानवाणी" की प्रस्तुतकर्ता वाणी शर्मा। MiG Buzz के साथ जुडने पर हम वाणी शर्मा जी का अभिनंदन करते है। 🎉 जो 6 सितंबर 2017 को MiG Buzz Exclusive के साथ आई और अपने "अमोल" वक्त किये। जैसा की आप जानते है की ये MiG Buzz Exclusive है तो हमने कुछ प्रश्न किये। चलिए जानते है उनकी प्रतिक्रिया -

MiG Buzz Exclusive's Questions


  • आपको ब्लॉगिंग के लिए प्रेरणा कहाॅ से मिली?
दैनिक भास्कर के मधुरिमा संस्करण में स्त्रियों के ब्लॉग के बारे में पढ़ा तो जानने की उत्सुकता हुई कि आखिर यह ब्लॉग है क्या...लिखने का शौक पहले से था मगर सिर्फ अपनी डायरी में। जब हिंदी ब्लॉग पढ़ कर देखे तो इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे बाहर की एक ऐसी दुनिया से मिलना हुआ जो वैचारिक स्तर पर मेल खाती थी इस तरह 2009 में ब्लॉगिंग की शुरुआत हुई।

  • नए ब्लॉगर के सफल ब्लॉगर्स बनने के लिए कुछ टिप्स?
टिप्स की तो मुझे ही जरुरत है.. मैं इतनी सफर ब्लॉगर नहीं रही हूँ। 😅

  • MiG Buzz के लिए कोई सुझाव या प्रतिक्रिया
हिंदी ब्लॉगिंग से आय के साधन उपलब्ध होने के अवसर तथा एक बेहतरीन एग्रीगेटर की उपस्थिति से ब्लॉगिंग को एक नई दिशा दी जा सकती है। इस दिशा में आपकी सक्रियता के लिए साधुवाद।


🔎  #Exclusive : उलूक टाइम्स से सुशील कुमार जोशी

Exclusive बातचीत मे वाणी शर्मा से मिलें कुछ विचारों को हम आपके साझा कर रहें हैै।

ब्लॉग घर से बाहर की दुनिया के विचार पढ़ने और उन पर विमर्श करते हुए स्वयं को अभिव्यक्त करने का एक बेहतरीन माध्यम साबित हुआ। विचारों को एक मुक्त आकाश मिला, साथी ब्लॉगर्स की सलाह और सराहना से लेखन को मजा और स्वयं की एक नई पहचान मिली। देश, समाज में हो रही हलचल का प्रभाव नागरिकों पर भी पड़ता है और लेखक/पाठक भी इससे अप्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते और जब वही लोग अंतरजाल की दुनिया में लेखक हों तो विभिन्न विचारधाराओं का मिलना, टकराना यहाँ भी होता रहा। व्यक्तिगत रूप से मुझे लाभ भी अधिक हुआ। क्योंकि मूलतः गृहिणी होने के कारण अपने सीमित समय में इस माध्यम से लिखना, पढ़ना ,सीखना मेरे लिए बहुत सुविधाजनक रहा।

अंतरजाल के माध्यम से हिंंदी ब्लॉग लेखन कमाई का विशेष जरिया नहीं बन सका है। इस कारण   सामान्य ब्लॉगर्स के लिए लेखन उनकी प्राथमिकता नहीं रही। फेसबूक, ट्विटर, वॉट्सऐप आदि तुरंत फुरंत वाले ऐप की सहज लोकप्रियता ने भी लेखन/पाठन की गंभीरता को नुकसान पहुंचाया। कुछ मामलों में बंदर के हांथ में उस्तरा आने जैसा भी रहा जिसके द्वारा आम जीवन की राजनीति ने यहाँ भी पंख पसारे। जिसने स्वस्थ विचार विमर्श को बेवजह के वाद विवाद में बदलते हुए हिंदी ब्लॉगिंग की साख को नुकसान पहुँचाया। एक अच्छे एग्रीगेटर की कमी के कारण ब्लॉग्स का नियमित फीडबैक नहीं मिल पाना भी सबसे बड़ा कारण रहा.. खुशी की बात है कि मंदी के दौर में भी कुछेक हिंदी ब्लॉग पर लेखन जारी है और उनके पाठक भी यथावत हैं।

वर्तमान में ब्लॉगिंग की सुस्त पड़ी रफ्तार को बढ़ाने के लिए ताऊ रामपुरिया, अर्चना चावजी, अंशुमाला आदि सक्रिय हुई हैं और इनके प्रयासों के फलस्वरूप प्रत्येक मास की पहली तारीख को आवश्यक रूप से पोस्ट लिखने की पहल ने इस माध्यम को पुनर्जीवित होने संभावना दी है।       - वाणी शर्मा
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6 comments:

  1. बढ़िया। शुभकामनाएं वाणी जी और उनके ब्लॉग ज्ञानवाणी के लिये।

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  2. क्या बात है .... बधाई सहित शुभकामनायें ....

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  3. कुछ सुधार हैं लेख में....
    *सफर-सफल
    लेखन में मजा-लेखन मँजा
    अप्रभावित-प्रभावित
    पुनर्जीवित होने की संभावना

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  4. मेरी प्रिय ब्लॉग लेखिका। सुंदर प्रस्तुति।

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